
आज लोकसभा में ऐतिहासिक श्रीराम मंदिर निर्माण और श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा पर चर्चा हुई। भाजपा सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह ने बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा पिछले महीने की 22 तारीख को अयोध्या में हुई थी, जो एक ऐतिहासिक अवसर था। उनका कहना था कि भगवान राम सभी के प्रेरणास्रोत हैं और वे सभी के हैं। श्री सिंह ने कहा कि राम भाव और संस्कृति हैं। उनका आरोप था कि कांग्रेस ने राम की अनदेखी की और कांग्रेस की वर्तमान दुर्दशा का कारण है। श्री सिंह ने कहा कि देश में करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक राम मंदिर है। कांग्रेस के गौरव गोगोई ने कहा कि इस देश के लोगों की सबसे बड़ी पहचान मानवता है। उनका कहना था कि यह विचार करना चाहिए कि क्या देश के अल्पसंख्यक, पिछड़े और वंचित लोग आज खुश हैं क्योंकि रामराज्य सभी का कल्याण चाहता है। उनका दावा था कि आज अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों पर अत्याचार बहुत बढ़ गया है। नफरत भगवान राम का सच्चा भक्त नहीं हो सकता।
बहस में बोलते हुए ग्रामीण विकास राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि वह भाग्यशाली हैं कि वे राम मंदिर निर्माण आंदोलन में शामिल हैं। उन्होंने गौरव गोगोई की टिप्पणियों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें उन कारसेवकों के बारे में भी बात करनी चाहिए थी जो पुलिस गोलीबारी में मारे गए थे। जनता दल यूनाई टेड के रामप्रीत मंडल ने कहा कि माता सीता की जन्मस्थली सीतामढ़ी में एक सुंदर मंदिर बनाया जाए। भाजपा के प्रताप चंद्र षडंगी ने कहा कि भगवान राम देश को एकजुट कर सकते हैं क्योंकि वह सभी के लिए हैं, जाति, पंथ और धर्म से ऊपर। शिवसेना के डॉ. श्रीकांत एकनाथ शिंदे ने कहा कि आजादी के बाद राम मंदिर बनना चाहिए।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 22 जनवरी ऐतिहासिक दिन है क्योंकि यह दशकों से चली आ रही राम मंदिर निर्माण की लड़ाई का अंत है। उनका कहना था कि 22 जनवरी 2024 को सभी रामभक्तों की आशाएं पूरी हुईं। श्री शाह ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण संवैधानिक और कानूनी है। उनका कहना था कि रामायण और रामचरितमानस के बिना भारत की संस्कृति और देश की कल्पना असंभव है। श्री शाह ने कहा कि रामलला की प्राण-प्रतिष् ठा ने 1528 से चले आ रहे लंबे आंदोलन को समाप्त कर दिया। गृहमंत्री ने कहा कि 22 जनवरी ने देश को विश्व गुरु के रास्ते पर ले जाने का मार्ग प्रशस्त किया। चर्चा चल रही है।
सदन की बैठक शुरू होने से पहले, तमिल मछुआरों की सुरक्षा को लेकर द्रमुक सदस्यों ने खड़े होकर नारे लगाने लगे। अध्यक्ष ने स्थगन प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इसके बाद वे सदन से विरोध प्रकट करने लगे।



