एसआईआर विवाद पर एसआईटी जांच और सीईसी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग सुप्रीम कोर्ट में याचिका

चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चल रहे विवाद के बीच उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें एसआईआर अभ्यास के दौरान वैधानिक कर्तव्यों में कथित लापरवाही के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग की गई है।
अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा वकील चांद कुरैशी के माध्यम से दायर जनहित याचिका में एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से 13 करोड़ मतदाताओं को कथित रूप से हटाए जाने की न्यायिक जांच या विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने की मांग की गई है।
पीठ ने शीर्ष अदालत से अनुरोध किया कि वह दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना कुमार द्वारा कथित तौर पर किए गए फैसलों, दिशानिर्देशों और सॉफ्टवेयर संशोधनों को असंवैधानिक घोषित करे और उन्हें अमान्य करे।
याचिकाकर्ता ने कहा, “प्रतिवादी संख्या तीन (सीईसी ज्ञानेश कुमार) के तहत शुरू किए गए, अनुमोदित या लागू किए गए सभी निर्णयों, दिशानिर्देशों, निर्देशों और सॉफ्टवेयर संशोधनों को पूर्ण आयोग की सहमति के बिना या चुनाव आयुक्तों की बहुमत की राय के विपरीत (सीईसी और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 के तहत) को असंवैधानिक, अधिकारातीत और शून्य घोषित किया जाए।
जनहित याचिका में कहा गया है, ”जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत प्रतिवादी संख्या 3, 5, 6 और अन्य सभी अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने और अभियोजन शुरू करने के लिए सक्षम वैधानिक प्राधिकारी को उचित निर्देश जारी करें।
याचिका में यह घोषणा करने की मांग की गई है कि एसआईआर से संबंधित ऐसे सभी निर्णय अवैध हैं, साथ ही नए मतदाताओं के रूप में मतदाता सूची में अपने नाम शामिल करने के लिए आवेदन करने के लिए व्यक्तियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले मूल फॉर्म 6 को बहाल करने की मांग की गई है।
जनहित याचिका में वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और चुनाव आयोग की महानिदेशक (सूचना प्रौद्योगिकी) सीमा खन्ना के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता ने प्रस्तुत किया कि आधिकारिक फाइलों से पता चलता है कि नवंबर 2025 और अगस्त 2026 के बीच 10 महीने की अवधि में, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के नाम पर लिए गए और निष्पादित किए गए “एकतरफा, अनधिकृत और अवैध” निर्णयों के खिलाफ कम से कम 14 अलग-अलग मौकों पर औपचारिक रूप से लिखित असहमति और आपत्तियां दर्ज कीं।
याचिकाकर्ता द्वारा उद्धृत कथित कदाचार में फॉर्म 6 में अनधिकृत संशोधन, मतदाता सूची डेटाबेस का केंद्रीकरण, ईसीआईनेट प्रणाली के माध्यम से पात्र मतदाताओं को बहाल करने में विफलता और चुनाव आयोग के नाम पर मतदाताओं को शामिल करने के खिलाफ पश्चिम बंगाल में 16.10 लाख अपीलें दायर करना शामिल है।



