केजरीवाल को एसआईआर नोटिस और वोटर मैपिंग को लेकर आप और बीजेपी के बीच लेन-देन का आरोप

आम आदमी पार्टी (आप) और भाजपा ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के सदस्यों को जारी नोटिस को लेकर रविवार को आरोप-प्रत्यारोप लगाए, आम आदमी पार्टी (आप) ने मानचित्रण प्रक्रिया में खामियों का आरोप लगाया और भाजपा ने कहा कि केजरीवाल के रिकॉर्ड को 2002 की दिल्ली मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जा सका। आप की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने सवाल किया कि तीन बार दिल्ली के मुख्यमंत्री रह चुके केजरीवाल और उनके परिवार के नाम एसआईआर प्रक्रिया के तहत ‘अनमैपिंग’ कैसे रह सकते हैं। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, केजरीवाल, उनके माता-पिता, पत्नी और बेटे को इस कवायद के तहत नोटिस जारी किया गया है। भारद्वाज ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और भाजपा मंत्री कपिल मिश्रा, आशीष सूद और रवींद्र इंद्रराज के चुनावी रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाया और आरोप लगाया कि उनके मतदाता पंजीकरण उनके सरकारी आवासों से अलग पते पर थे। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया आम मतदाताओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है जो अपने रिकॉर्ड स्थापित करने में असमर्थ हैं। भारद्वाज ने आरोप लगाया कि जिन मतदाताओं ने अपने घरों को बदल दिया है, अगर उनके रिकॉर्ड की सही तरीके से मैपिंग नहीं की गई तो वे अपना नाम सूची से खो सकते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि एसआईआर से पहले की कवायद के दौरान लगभग 10 लाख नामों को पहले ही हटा दिया गया था और आरोप लगाया कि दिल्ली के मतदाताओं की कुल संख्या लगभग 43 प्रतिशत थी।

आरोपों का जवाब देते हुए दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के लिए मतदाताओं के रिकॉर्ड को पिछली मतदाता सूची के साथ मैप करने की आवश्यकता होती है और दावा किया कि केजरीवाल का परिवार 2013 से पहले गाजियाबाद में मतदाता के रूप में पंजीकृत था।

मल्होत्रा ने कहा कि नोटिस जारी करने से केजरीवाल या किसी अन्य पात्र नागरिक को दिल्ली में अपना नाम पंजीकृत कराने से नहीं रोका जा सकता, बशर्ते कि उन्होंने पहले अपने पंजीकरण के स्थान पर मतदाता सूची से अपना नाम हटा दिया हो।

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