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Som Pradosh Vrat 2025: सोम प्रदोष व्रत के दिन इन मंत्रों का जाप करें, तो विवाह में बाधाएं दूर होंगी!

Som Pradosh Vrat 2025: सोम प्रदोष व्रत के दिन विधि-विधान से पूजा करने और कुछ मंत्रों का जाप करने से भगवान शिव और माता पार्वती की असीम कृपा मिलती है, जिससे वैवाहिक जीवन में सभी बाधाएं दूर होती हैं और सुख-शांति बनी रहती है।

Som Pradosh Vrat 2025 Mantra: सोमवार को आषाढ़ मास का पहला प्रदोष व्रत है। इसे सोमवार को पड़ने के कारण सोमप्रदोष व्रत कहते हैं। सोम प्रदोष व्रत माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित है। प्रदोष काल, या सूर्यास्त के बाद, भगवान शिव और माता पार्वती कैलाश पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। सोम प्रदोष व्रत को विशेष रूप से वैवाहिक बाधाओं को दूर करने और सुखी वैवाहिक जीवन जीने के लिए बहुत प्रभावशाली माना जाता है। सोम प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के विशिष्ट मंत्रों का जाप करें, जो वैवाहिक जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करते हैं, शीघ्र विवाह करने के योग बनाते हैं और दांपत्य जीवन में सुख-शांति लाते हैं।

पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास की त्रयोदशी तिथि 23 जून को सुबह 1 बजकर 21 मिनट पर शुरू होगी और रात 10 बजकर 9 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में, उदया तिथि के अनुसार 23 जून को प्रदोष व्रत रखा जाएगा। निशिता काल में भगवान शिव की पूजा प्रदोष में की जाती है।

“ॐ नमः शिवाय”: यह भगवान शिव का मूल मंत्र (मूल मंत्र) है. यह सबसे शक्तिशाली और सर्वव्यापी मंत्रों में से एक है. इसका जाप करने से मन शांत होता है, सभी बाधाएं दूर होती हैं और भगवान शिव की सीधी कृपा प्राप्त होती है. वैवाहिक बाधाओं के लिए यह अत्यंत प्रभावी है. प्रदोष काल में भगवान शिव के समक्ष बैठकर रुद्राक्ष की माला से कम से कम 108 बार जाप करें.

“ॐ पार्वतीपतये नमः”: यह मंत्र भगवान शिव को माता पार्वती के पति के रूप में संबोधित करता है, जिससे शिव और शक्ति दोनों का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त होता है. वैवाहिक संबंधों को मजबूत करने और जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए यह बहुत शुभ है. शिव-पार्वती की युगल प्रतिमा के सामने बैठकर इस मंत्र का जाप करें.

शिव गायत्री मंत्र: “ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥” यह भगवान शिव को समर्पित गायत्री मंत्र है, जो ज्ञान, बुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है. यह मन को शांत करता है और विवाह संबंधी सही निर्णय लेने में मदद करता है.

वैवाहिक जीवन के लिए विशेष मंत्र: “हे गौरी शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकरप्रिया। मां कुरु कल्याणि कांत कांतां सुदुर्लभाम्॥” यह मंत्र विशेष रूप से शीघ्र विवाह और मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए समर्पित है. इसमें माता पार्वती से प्रार्थना की जाती है कि जिस प्रकार वे शंकर प्रिया हैं, वैसे ही उपासक को भी एक दुर्लभ और प्रिय पति/पत्नी प्राप्त हो. प्रदोष काल में माता पार्वती और भगवान शिव की युगल प्रतिमा के समक्ष इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें.

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