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Jalandhar News: जालंधर में AAP और BJP के निर्वाचित प्रत्याशी, कांग्रेस में तेज तर्रार युवा नेता या “मूकदर्शक महिला” पर फंसा पेंच

Jalandhar News: जालंधर वेस्ट विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में पार्टियों ने अभी तक उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं। 21 जून नामांकन की अंतिम तिथि है। सोमवार को ईद की छुट्टी होने के कारण नामांकन नहीं होगा। इसके बाद केवल 4 दिन बचेंगे।

भाजपा और आम आम आदमी पार्टी (AAP) ने उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए हैं, लेकिन वे अभी आधिकारिक रूप से घोषणा नहीं कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस तीन दिनों से उम्मीदवार के नाम पर मंथन कर रही है।

AAP ने मोहिंदर भगत का नाम निर्धारित किया

आम आदमी पार्टी ने मोहिंदर भगत को जालंधर वेस्ट हलके के उपचुनाव के लिए चुना है। इनके नाम की आधिकारिक रूप से घोषित करना बाकी है। अमृतपाल और स्टीवन कलेर भी इस दौरान चर्चा में हैं। AAP ने हालांकि निर्णय लिया है कि मोहिंदर भगत को ही टिकट दिया जाएगा।

शीतल अंगुराल भाजपा से प्रत्याशी फाइनल

भाजपा ने भी अपने प्रत्याशी का नाम करीब-करीब तय कर लिया है। लोकसभा चुनाव से पहले विधायक पद की कुर्बानी देने वाले शीतल अंगुराल की टिकट लगभग तय है। यद्यपि, सुशील रिंकू (Sushil Rinku) ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है कि शीतल को टिकट मिलने पर FIR दर्ज हो जाएगा। क्योंकि सुशील रिंकू की पत्नी सुनीता रिंकू इस टिकट पर दावा कर रही हैं

कांग्रेस में मंथन, सुरिंदर या जंगराल?

उधर, कांग्रेस अभी भी विचार कर रही है। कांग्रेस की उच्चस्तरीय बैठक में उम्मीदवार के चेहरे पर चर्चा हुई। कांग्रेस पंजाब मामलों के प्रभारी देवेंद्र यादव जालंधर पहुंच गए हैं। इस दौरान, पंजाब के प्रधान सांसद राजा वड़िंग भी जालंधर आए और सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के घर पर एक लंबी बैठक की।

कांग्रेस ने चरणजीत सिंह चन्नी के निकटस्थ अश्वनी जंगराल को टिकट देने की चर्चा की है। इसके बावजूद, जालंधर के पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर सुरिंदर कौर ने भी इसका दावा किया है। लेकिन पार्टी में चर्चा है कि सुरिंदर कौर नगर निगम में पांच साल तक “मौन” रहीं, जिससे अगर विधानसभा पहुंची तो वहां भी मौन रहेंगी, इससे कांग्रेस को नुकसान हो सकता है।

सुरिंदर कौर ने पांच साल तक “मौन” रहीं

कांग्रेस के सूत्रों ने कहा कि सुरिंदर कौर ने पांच साल तक सीनियर डिप्टी मेयर के रूप में दफ्तर में बहुत कम बैठी। वे सिर्फ मूक दर्शक बनी रहती थीं नगर निगम हाउस की बैठक में भी। स्थिति तब बिगड़ी जब वे अपने वार्ड से संबंधित समस्साएं हल नहीं करवा पाईं।

विधानसभा में एक ‘मौनव्रत’ महिला नहीं, बल्कि एक तेज तर्रार युवा चाहिए

अब चर्चा है कि अगर कांग्रेस सुरिंदर कौर को टिकट देती है और वे जीत भी जाती हैं तो क्या विधानसभा में मौनव्रत टूट जाएगा? कांग्रेस इससे दुखी है। क्योंकि कांग्रेस को विधानसभा में एक साहसी नेता चाहिए, न कि एक मौन रहने वाली महिला।

अकाली दल से महिंदर केपी चर्चा में

जब बात अकाली दल के प्रत्याशी की आती है, तो अकाली दल अभी तक “खाली” है। यह चर्चा है कि लोकसभा चुनाव में इस सीट से हारने वाले महिंदर सिंह केपी को चुनाव लड़ाया जा सकता है। महिंदर सिंह केपी  भी उपचुनाव लड़ना चाहते हैं।

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