बिहार में धान खरीद की तारीखें घोषित, किसानों को 48 घंटे में मिलेगा ₹2461 प्रति क्विंटल का रेट

एक नवंबर से उत्तर बिहार और 15 नवंबर से दक्षिण बिहार में धान की सरकारी खरीद होगी। इसकी तैयारियों को लेकर सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने शुक्रवार को समीक्षा की। उन्होंने धान खरीद में पूरी पारदर्शिता रखने का आदेश संबंधित अधिकारियों को दिया।

उन्होंने कहा कि सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2441 रुपये प्रति क्विंटल तथा ग्रेड-ए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य उपलब्ध कराना है। लाभुक किसानों को 48 घंटे के अंदर राशि भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि धान खरीद में किसानों के लिए एग्री स्टैक के डाटा का उपयोग किया जाएगा। इच्छुक सभी किसानों से अनुरोध किया गया है कि वह अपना एग्री स्टैक आइडी समय से बनवा लें।

पैक्स एवं व्यापार मंडल के अध्यक्षों प्रबंधकों एवं पद धारकों से इस कार्य में सहयोग लिया जा सकता है। धान बिक्री हेतु इच्छुक किसानों के आवेदन के लिए esahkari.bihar.gov.in पोर्टल पर व्यवस्था की गई है।

मौसम की बेरुखी, कीटों का पहरा

कम वर्षापात से परेशान किसानों की चिंता अब धान की फसल पर कीटों के हमले ने बढ़ा दी है। पौधों पर भूरा मधुआ कीट और चतरा रोग का प्रकोप बढ़ रहा है, जिससे उपज पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।

चतरा रोग में कीट धान के तनों से रस चूसता है। फसल बचाने के लिए किसान कीटनाशकों का छिड़काव कर रहे हैं, लेकिन इसका असर सीमित दिख रहा है। सावन में कम बारिश के बाद भादो के अंत में हुई थोड़ी वर्षा से फसल को राहत मिली थी।

अब बालियां निकलने के समय कीटों के प्रभाव ने किसानों की परेशानी फिर बढ़ा दी है। किसान रबींद्र सिंह, बाल्मीकि शर्मा, मनोज कुमार और प्रमोद महतो ने बताया कि रोग तेजी से फैल रहा है।

पत्ते झुलस रहे हैं, पौधों की वृद्धि रुक गई है और वे पीले होकर नष्ट होने लगे हैं। फसल बचाने के प्रयासों के बावजूद सफलता नहीं मिल रही है।

कृषि विज्ञानी ने दी बचाव की सलाह

कृषि विज्ञान केंद्र लोदीपुर की कृषि विज्ञानी डॉ. अनीता ने बताया कि किसानों से चतरा रोग की शिकायतें मिल रही हैं। किसान मोबाइल पर उपाय पूछ रहे हैं और उन्हें उपचार बताया जा रहा है।

रोग में पत्तियों और तनों पर चकत्ते दिखाई देते हैं, जिससे फसल झुलसने लगती है। इससे उत्पादन में 50 से 60 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है। मेड़ पर अधिक घास होने से बीमारी फैलती है।

उन्होंने किसानों को यूरिया का संतुलित मात्रा में उपयोग करने और धान की घनी रोपाई से बचने की सलाह दी। प्रकोप दिखने पर प्रोपिकोनाजोल 25 ईसी या हेक्साकोनाजोल 5 ईसी का प्रति हेक्टेयर 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

इस समय तना छेदक कीट का असर भी बढ़ता है। इससे बचाव के लिए फिप्रोनिल 05 ईसी या करटाप हाईड्रोक्लोराइड 50 एसपी का छिड़काव आवश्यक है। इससे फसल का नुकसान कम होगा।

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