विटामिन डी से जुड़ी गलती… खुद से गोली लेना और फिर बंद कर देना, ये कितना खतरनाक?

बॉडी में कैल्शियम के एब्जॉर्बपशन के कारण विटामिन डी हड्डियों और मसल्स को हेल्थ में बहुत काम आता है. अगर किसी बच्चे में इसकी कमी है तो उसे Rickets और बड़ों में ऑस्टियोमलेशिया, हड्डियों में दर्द और मांसपेशियों में कमजोरी होने लगती है. आज के समय में विटामिन डी की कमी ज्यादातर भारतीयों है. इसलिए इसके इंटेक को पूरा करने के लिए सप्लीमेंट्स लिए जाते हैं. पर क्या आप जानते हैं कि खुद से सप्लीमेंट या विटामिन डी की गोली लेना भी नुकसान पहुंचा सकता है. लोग खुद से गोली शुरू करते हैं और फिर बंद भी कर देते हैं.
विटामिन डी से जुड़ी ये गलती सेहत को कई गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है. चलिए आपको बताते हैं कि हमें दिनभर में कितना विटामिन डी चाहिए होता है? इसकी गोली ले रहे हैं तो किन गलतियों से बचना चाहिए.
भारतीयों में विटामिन डी की कमी
पबमेड में साउथ एशियन स्टडीज की 65 स्टडी का जिक्र किया गया है. इसमें 44717 भागीदार थे जिनमें से 68 फीसदी में विटामिन डी की कमी मिली. भारतीयों का आंकड़ा देखा जाए तो ये करीब 67 फीसदी था. वैसे अलग-अलग स्टडी, जनसंख्या और डेफिसिएंसी कट ऑफ के कारण इसे पूरे भारत की लेटेस्ट आबादी पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता. लेकिन ये माना जा सकता है कि ज्यादातर भारतीयों में विटामिन डी की कमी है.
Vitamin D Intake By Age
खुद से विटामिन डी की गोली लेना
डॉ. निशांत जैन, (कंसल्टेंट एंडोक्रिनोलॉजी, कैलाश दीपक हॉस्पिटल) कहते हैं कि विटामिन डी की कमी और विटामिन डी की जरूरत, दोनों व्यक्ति के हिसाब से अलग हो सकती हैं. इसलिए बिना जांच और डॉक्टर की सलाह के हाई डोज लेना सही नहीं है. विटामिन डी फैट में घुलने वाला विटामिन है. इसकी ज्यादा मात्रा शरीर में जमा हो सकती है.
ज्यादा विटामिन डी लेने पर क्या होता है
एक्सपर्ट ने बताया बहुत ज्यादा विटामिन डी लेने से खून में कैल्शियम का स्तर जरूरत से ज्यादा बढ़ सकता है. इसे हाइपरकैल्सीमिया कहते हैं. आसान भाषा में कहें तो शरीर में कैल्शियम इतना बढ़ जाता है कि वह नुकसान करने लगता है. अगर कैल्शियम का स्तर बढ़ जाए तो मतली, कमजोरी, भूख कम होना, ज्यादा प्यास, बार-बार यूरिन आना, डिहाइड्रेशन और किडनी में पथरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
इन बातों का रखें खास ख्याल
इसलिए सिर्फ थकान, शरीर में दर्द या कमजोरी महसूस होने पर खुद से विटामिन डी शुरू कर देना सही तरीका नहीं है. पहले जरूरत का आकलन होना चाहिए और फिर सही डोज तय होनी चाहिए. एक्सपर्ट कहते हैं कि विटामिन डी को भी किसी दूसरी दवा की तरह ही लें.
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अगर डॉक्टर ने सप्लीमेंट लेने की सलाह दी है, तो बताई गई मात्रा और अवधि का ही पालन करें. ज्यादा डोज का मतलब ज्यादा फायदा नहीं है. सही व्यक्ति को, सही मात्रा में, सही समय तक दिया गया विटामिन डी ही सुरक्षित और उपयोगी है.
विटामिन डी की कमी कैसे करें पूरी
सनलाइट है सबसे बड़ा सोर्स- दरअसल, स्किन पर धूप के पड़ने पर बॉडी में विटामिन डी बनाता है. लेकिन उम्र और पिगमेंटेशन या शरीर को ढककर रखने जैसी कंडीशन की वजह से विटामिन डी प्रोडक्शन पर बुरा असर पड़ सकता है.
खाने की चीजें- कई ऐसे नेचुरल फूड्स हैं जिनसे विटामिन डी मिलता है. इसमें फैटी फिश, एग यॉक, लिवर, चीज, देसी घी और मशरूम से विटामिन डी मिलता है. वैसे फोर्टिफाइड फूड भी इसका बड़ा सोर्स हो सकते हैं.



