बहादुर जवानों की वजह से खत्म हुआ मप्र में नक्सल आतंक : सीएम राष्ट्रीय सुरक्षा में पुलिस की भूमिका की सराहना की

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राष्ट्रीय सुरक्षा बनाए रखने में पुलिस और सशस्त्र बलों द्वारा निभाई गई ‘महत्वपूर्ण भूमिका’ की सराहना की और कहा कि साहसी सैनिकों के कारण राज्य नक्सल खतरे को समाप्त करने में सफल रहा, जिसे उसने तीन दशकों से अधिक समय तक झेला।

यहां शहीद स्मारक मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय पुलिस स्मृति दिवस परेड 2026 को संबोधित करते हुए उन्होंने अपनी दक्षता के माध्यम से मध्य प्रदेश की प्रतिष्ठा बढ़ाने में योगदान के लिए पुलिस की भी प्रशंसा की।

उन्होंने कहा, ‘यह हमारे लिए बहुत गर्व का क्षण है कि हमारा राज्य अब नक्सलवाद के अभिशाप से उबरने में सफल रहा है, जिसे वह लगभग 35 वर्षों से सहन कर रहा था। यह एक कठिन दौर था, कई चुनौतियों से भरा था। हालांकि, हमारे बहादुर और साहसी सैनिकों ने अपने अदम्य साहस, वीरता और समर्पण से राज्य को गौरवान्वित किया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में राज्य ने नक्सलवाद की गंभीर चुनौती से सफलतापूर्वक निपटा है और उस पर काबू पाया है।

यादव ने कहा कि देश में पुलिसकर्मियों के बलिदान को याद करने के लिए 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है।

उनके अनुसार यह दिन हमें याद दिलाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, शांति और सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने में हमारे पुलिस बल और सशस्त्र बलों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा, “हमारे इतिहास में पुलिस और सशस्त्र बलों का विशेष महत्व है। हमारी सनातन संस्कृति में, हथियार उठाने का अर्थ केवल शक्ति का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र की रक्षा करने का संकल्प है। इस अवसर पर हम उन वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जिन्होंने अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए राष्ट्र और समाज की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति भी दे दी।

उन्होंने कहा, “यह ऐसे अमर शहीदों का बलिदान है जिसने हमेशा हमारे समाज, हमारे देश और हमारे राज्य को गौरवान्वित किया है। मैं इन सभी अमर शहीदों को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

उन्होंने कहा कि लाल चौक से लाल किले की प्राचीर तक लहरा रहा तिरंगा आज पूरे देश और दुनिया के सामने भारत के स्वाभिमान, शक्ति और गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है।

उन्होंने कहा, “यह ध्वज हमारे बहादुर सैनिकों की गाथा, उनके अदम्य साहस और अमर बलिदान को भी व्यक्त करता है। आज जब पूरी दुनिया उथल-पुथल और अनेक चुनौतियों के दौर से गुजर रही है, भारत का लोकतंत्र सुरक्षित और मजबूत बना हुआ है। हमारे सशस्त्र बल और पुलिस बल इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यादव ने कहा कि राष्ट्र की एकता, अखंडता और आंतरिक सुरक्षा को बनाए रखने के प्रति उनका समर्पण हम सभी के लिए एक प्रेरणा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह सभी शहीदों को सलाम करते हैं और देश की रक्षा के लिए दिन-रात काम करने वाले सभी पुलिस और सशस्त्र बलों के जवानों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।

सरकार ने महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं जो हमारे पुलिस कर्मियों और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि यह शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है, और इस राशि का 50 प्रतिशत शहीद की पत्नी को और शेष 50 प्रतिशत माता-पिता को देने का निर्णय लिया गया है।

उन्होंने कहा, “हम साइबर अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने की चुनौती का सामना कर रहे हैं, और हमारे पुलिसकर्मी हमेशा की तरह इन चुनौतियों का सामना करेंगे।

इससे पहले यादव ने शहीदों की वेदी पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने इस वर्ष ड्यूटी के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले नौ पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को श्रद्धांजलि दी।

पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाना ने कहा, “आज हम उन बहादुर पुलिसकर्मियों को याद करते हैं जिन्होंने कर्तव्य का पालन करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। हमारे सैनिकों ने राष्ट्र और राज्य की सुरक्षा बनाए रखने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बलिदान दिया है। मध्य प्रदेश पुलिस बल का गौरवशाली इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य के अधिकारियों ने कश्मीर से तमिलनाडु और गोवा से नगालैंड तक सेवा दी है।

इस साल मध्य प्रदेश पुलिस के नौ पुलिसकर्मियों और अधिकारियों ने अपने प्राणों की आहुति दी। हमारी संवेदनाएं सभी शहीदों के परिवारों के साथ हैं। वे हमारे पुलिस परिवार का हिस्सा हैं, और उनकी देखभाल करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। पुलिस सेवा सिर्फ एक नौकरी नहीं है, यह एक जिम्मेदारी है, समर्पण और बलिदान के प्रति प्रतिबद्धता है।

राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 10 कर्मियों की याद में मनाया जाता है, जो 1959 में आज ही के दिन लद्दाख के हॉट स्प्रिंग इलाके में चीनी सैनिकों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में मारे गए थे।

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