एक कहावत है जो बार-बार दोहराई जाती है मां का दूध बच्चे का पहला टीका होता है. ऐसी बातें बिना वजह नहीं चलतीं क्योंकि ये बात असल में सही है. कोलोस्ट्रम, वह सुनहरे रंग का तरल जो बच्चे के जन्म के कुछ दिनों बाद माँ के शरीर में बनता है, उसमें कई अच्छी चीज़ें और सुरक्षा देने वाले तत्व होते हैं. यह ठीक उसी समय मिलता है जब नवजात शिशु के पास अपनी कोई सुरक्षा नहीं होती. मां का दूध नवजात की सेहत के लिए वरदान है और इसके महत्व को समझाने के लिए हर साल 1 से 7 अगस्त के बीच में ब्रेस्टफीडिंग वीक मनाया जाता है.
ब्रेस्टफीडिंग वीक की शुरुआत साल 1992 में हुई. इसके जरिए महिलाओं को ये समझाना है कि बच्चे के लिए उसकी मदर का मिल्क कितना जरूरी है. आज के समय में माएं पाउडर वाले मिल्क की हेल्प लेने लगी है. इससे बच्चे को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते. एक्सपर्ट से जानें बच्चे के लिए क्यों जरूरी है मां का दूध?
ब्रेस्टफीडिंग वीक कैसे शुरू हुआ?
ये वीक हर साल 1 से 7 अगस्त तक मनाया जाता है और इसकी शुरुआत 1992 में हुई थी, जब ‘वर्ल्ड अलायंस फ़ॉर ब्रेस्टफ़ीडिंग एक्शन’ ने ‘वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन’ और UNICEF के साथ मिलकर इसे शुरू किया था. तीस साल बाद भी, इन दोनों ऑर्गनाइज़ेशन का इस हफ़्ते के आयोजन पर काफ़ी असर है. वे हर साल इसके लिए एक थीम चुनते हैं. वे सीखने-सिखाने का ऐसा मटेरियल तैयार करते हैं जो क्लीनिक और लोकल ग्रुप तक पहुंचता है.
आयुर्वेद क्या कहता है?
यह समझना जरूरी है कि ब्रेस्ट मिल्क असल में कैसे काम करता है? क्योंकि यह जितना लोग सोचते हैं, उससे कहीं ज्यादा अनोखा और हालात के हिसाब से बदलने वाला होता है. यह कोई एक जैसा फॉर्मूला नहीं है. हर बार दूध पिलाने पर इसका कंपोजिशन बदलता रहता है और उस समय बच्चे को जिसकी जरूरत होती है, उसके हिसाब से यह खुद को ढाल लेता है. खासकर कोलोस्ट्रम में एंटीबॉडी भरपूर मात्रा में होती हैं, जो सीधे मां की अपनी इम्यून हिस्ट्री से आती हैं. यह एक तरह की विरासत में मिली सुरक्षा है, जो ठीक उसी समय बच्चे को मिलती है जब उसके पास अपनी कोई सुरक्षा नहीं होती.
बच्चे से दूर रहती हैं ये परेशानियां
शुरुआती महीनों में सिर्फ मां का दूध पीने वाले बच्चे डायरिया या सांस के संक्रमण जैसी बीमारियों से दूर रहते है. यह कोई मामूली या अतिरिक्त फायदा नहीं है. जिस बच्चे के पास अभी अपनी कोई रोग-प्रतिरोधक क्षमता नहीं है, उसके लिए अक्सर यही सुरक्षा का एकमात्र वास्तविक जरिया होता है.
बच्चे और मां दोनों को फायदा
इसके फायदे दोनों तरफ होते हैं. ब्रेस्टफीडिंग से ऑक्सीटोसिन हार्मोन निकलता है, जो डिलीवरी के बाद गर्भाशय को सिकुड़ने और ब्लीडिंग कम करने में मदद करता है. कभी-कभी यह भी कहा जाता है की, यह सिर्फ एक बॉन्डिंग हार्मोन नहीं है, बल्कि एक असली शारीरिक सुरक्षा है. ब्रेस्टफ़ीडिंग ब्रेस्ट और ओवेरियन कैंसर, टाइप 2 डायबिटीज़ और दिल की बीमारियों का जोखिम भी कम करता है.
यह एक ऐसी सुरक्षा है जो सालों-साल धीरे-धीरे बनती है और डॉक्टर के क्लिनिक के बाहर शायद ही कभी इसकी चर्चा होती है. इसे परफेक्शन की जरूरत नहीं है. ज़रूरी नहीं कि माँ ठीक छह महीने तक ही स्तनपान कराए या सिर्फ स्तनपान ही कराए. हर एक अतिरिक्त दिन मायने रखता है. जब कोई मुश्किल लैच (बच्चे के मुँह से निप्पल पकड़ने का तरीका) को ठीक करने में मदद करता है और स्तनपान ठीक से हो पाता है, यह बच्चे की इम्यूनिटी के लिए और माँ की सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है.
आयुर्वेद के अनुसार ब्रेस्टफीडिंग के फायदे
आयुर्वेद में बच्चे और मां, दोनों के लिए स्तनपान के फायदों को बहुत महत्व दिया गया है. जन्म के समय से ही यह बच्चों के लिए सबसे अच्छा आहार रहा है. आयुर्वेद के अनुसार, मां का दूध अमृत के समान होता है और शिशुओं के लिए सबसे अच्छा आहार है. यह ‘रस धातु’ से बनता है, जो शरीर को पोषण देने वाला मुख्य ऊतक है. मां के खानपान, जीवनशैली, भावनात्मक स्थिति और शरीर के दोषों का इस पर असर पड़ता है.
डॉ. चंचल शर्मा का मानना है कि आप जो खाते-पीते हैं, उसका सीधा असर आपकी एनर्जी लेवल, मूड और दूध बनने की प्रक्रिया पर पड़ता है. पोषक तत्वों से भरपूर डाइट आपके शरीर को रिकवर करने और दूध का बहाव बनाए रखने में मदद करती है.
Related Articles
-
डॉक्टरस्पीक: रजोनिवृत्ति हार्मोन थेरेपी के लाभों और जोखिमों को समझना
-
वैज्ञानिकों ने पाया है कि उम्र के साथ मांसपेशियां कमजोर होने का एक छिपा हुआ कारण : अध्ययन
-
अमृतसर: ’10 में से 4 भारतीयों को फैटी लीवर हो सकता है, ज्यादातर को पता नहीं है’
-
अमृतसर: विशेषज्ञों ने स्ट्रोक का समय पर इलाज पर जोर दिया
-
अध्ययन नौसिखिए वायलिन वादकों की मस्तिष्क गतिविधि को मापता है, जबकि वाद्य यंत्र बजाना सीखते हैं
-
93.5 फीसदी छात्र मानसिक स्वास्थ्य को पहचानते हैं, 15.9 फीसदी मदद मांगते हैं: सर्वे
-
वैज्ञानिकों ने ब्लड प्रेशर की दवा गायब होने के छिपे खतरे का खुलासा किया: अध्ययन
-
दुनिया भर में ज्यादातर लोग 3 आम बीमारियों के लिए ‘उच्च आनुवंशिक जोखिम’ का सामना करते हैं: अध्ययन
-
मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति वाले 77 प्रतिशत लोगों ने सुलभ सेवाओं के बावजूद इलाज नहीं कराया: निमहांस अध्ययन
-
बुजुर्गों को नियमित टीकाकरण की आवश्यकता क्यों है
-
अध्ययन से पता चलता है कि स्वयंसेवा, स्पोर्ट्स क्लब की सदस्यता दिमाग को तेज रखने में प्रभावी हो सकती है
-
हरियाणा में दीपावली और छठ पूजा से पहले खाद्य सुरक्षा जांच तेज जिलों को 150 अतिरिक्त नमूने एकत्र करने का काम सौंपा गया
-
एफएसएसएआई ने खाद्य व्यवसाय संचालकों से सभी खराब होने वाली वस्तुओं के लिए तापमान नियंत्रित परिवहन सुनिश्चित करने को कहा
-
एफएसएसएआई ने खाद्य व्यवसाय संचालकों से सभी खराब होने वाली वस्तुओं के लिए तापमान नियंत्रित परिवहन सुनिश्चित करने को कहा
-
बाएं दिमाग बनाम दाएं दिमाग वाला: मिथक या वास्तविकता?
-
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हवाई किराए की कीमतों को विनियमित करने के उद्देश्य से नियमों को पहले ही आवश्यक प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है। उन्होंने कहा, ‘नियमों को अंतिम रूप दे दिया गया है और नियमों को प्रशासनिक मंजूरी दे दी गई है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ से कहा, “इसे दो सप्ताह के भीतर प्रकाशित किया जाएगा। पीठ ने मेहता से कहा कि वह सुनवाई की अगली तारीख पर भारतीय वायु अधिनियम, 2024 के तहत प्रकाशित नियमों को उसके समक्ष रखें वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र श्रीवास्तव ने नियमों को प्रकाशित करने में देरी पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस साल दिवाली से पहले भी यही मुद्दे उठे हैं। हालांकि, केंद्र की दलीलों के मद्देनजर, पीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन द्वारा दायर जनहित याचिका पर 16 नवंबर को आगे की सुनवाई के लिए स्थगित कर दिया, जिसमें निजी एयरलाइनों द्वारा मनमाने और अत्यधिक हवाई किराए की कीमत को चिह्नित किया गया था। लक्ष्मीनारायणन ने नागरिक उड्डयन क्षेत्र में “अपारदर्शी, शोषणकारी और एल्गोरिदम-संचालित” मूल्य निर्धारण प्रथाओं को चुनौती दी है। जनहित याचिका में कहा गया है कि आपात स्थिति, त्योहारों और यात्रा के दौरान टिकट की कीमतों में अचानक वृद्धि से उन यात्रियों को कठिनाई होती है, जिन्हें चिकित्सा, शैक्षिक या रोजगार संबंधी कारणों से यात्रा करने की आवश्यकता होती है। इसने कॉम्प्लीमेंट्री चेक-इन बैगेज भत्ते को 25 किलोग्राम से घटाकर 15 किलोग्राम करने पर सवाल उठाया, यह आरोप लगाते हुए कि यात्रियों को उन सेवाओं के लिए अतिरिक्त शुल्क के अधीन किया गया था जो पहले उनके टिकटों में शामिल थे। लक्ष्मीनारायणन ने एक मजबूत और स्वतंत्र नियामक की मांग की है जो नागरिक उड्डयन क्षेत्र में पारदर्शिता और यात्री सुरक्षा सुनिश्चित करे और भारत में निजी एयरलाइनों द्वारा लगाए गए हवाई किराए और सहायक शुल्कों में “अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव” को नियंत्रित करने के लिए नियामक दिशानिर्देश सुनिश्चित करे। इससे पहले, शीर्ष अदालत ने निजी एयरलाइनों द्वारा लिए जाने वाले हवाई किराए को तर्कसंगत बनाने की मांग की थी और केंद्र से हवाई यात्रियों को राहत प्रदान करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा, ‘लोगों को कुछ राहत देने की कोशिश करें। उसी दिन, एक ही गंतव्य के लिए उड़ानें – एक एयरलाइन 8,000 रुपये लेती है, जबकि दूसरी इकोनॉमी क्लास में 18,000 रुपये चार्ज करती है। इसमें कुछ तर्कसंगतता होनी चाहिए।
-
प्रभावित उत्तर भारतीय परिवारों में से 30% को विरासत में मिले कैंसर का खतरा है
-
कैंसर के बढ़ते मामलों पर डॉक्टर ने कहा, इलाज के लिए शुरुआती पहचान महत्वपूर्ण है
-
कौन थीं रचना श्रॉफ? भारतीय-अमेरिकी कैंसर विशेषज्ञ जिन्होंने जीवन सीमित करने वाले कैंसर के साथ रहते हुए काम करना जारी रखा
-
भारतीय-अमेरिकी ऑन्कोलॉजिस्ट रचना श्रॉफ का 47 साल की उम्र में निधन
-
महिलाएं दूसरों की भावनाओं को समझने में बेहतर होती हैं, पुरुष अपनी भावनाओं को संभालने में बेहतर होते हैं: विश्लेषण
-
‘स्कूलों में वड़ा पाव की दुकानें फिर से खोलें’: लड़के ने महाराष्ट्र एफडीए प्रमुख तुकाराम मुंढे से किया अनुरोध, यहां वह क्या कहते हैं
-
लॉन्ग कोविड मुंह, फेफड़ों में बैक्टीरिया को प्रभावित कर सकता है: अध्ययन
-
बैक्टीरिया वायरस के खिलाफ अपना हथियार खुद बनाते हैं: अध्ययन
-
बैक्टीरिया वायरस के खिलाफ अपना हथियार खुद बनाते हैं: अध्ययन
-
केंद्र गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं के लिए व्यापार मार्जिन को 30 प्रतिशत तक सीमित करेगा
-
प्रजनन उपचार के लिए चाहने वाली 14.4 फीसदी महिलाओं में पीसीओएस का पता चला: जालंधर के डॉक्टर
-
मस्तिष्क स्वास्थ्य की रक्षा करना
-
विशेषज्ञ से पूछें: अनियमित पीरियड्स पीएमओएस, थायरॉयड के कारण हो सकते हैं, न कि केवल पेरिमेनोपॉज के कारण
-
बचपन में दुर्व्यवहार से मस्तिष्क के स्थायी ‘निशान’ रह सकते हैं, महिलाओं में प्रभाव अधिक मजबूत हो सकता है: अध्ययन
-
जम्मू-कश्मीर में 51,000 कैंसर के मरीज स्क्रीनिंग और उपचार का विस्तार किया गया: मंत्री
-
अधेड़ उम्र से पहले शहरी कार्यबल पर स्वास्थ्य जोखिम का खतरा: अध्ययन
-
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सीलबंद क्रशर को चलाते हुए पाया, एफआईआर दर्ज
-
मांसपेशियों के निर्माण से अधिक, ल्यूसीन आपकी कोशिकाओं को भी शक्ति प्रदान करता है: अध्ययन
-
प्रति मिलियन जनसंख्या पर स्वैच्छिक रक्तदान के मामले में पंजाब देश में तीसरे स्थान पर
-
मिनिमली इनवेसिव स्पाइन सर्जरी का उद्देश्य सटीकता, रिकवरी है: डॉक्टर
-
रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं को दिल का दौरा पड़ने का खतरा अधिक
-
30 के दशक के मध्य में बच्चे की योजना बनाने से पहले दोनों भागीदारों के लिए स्वास्थ्य जांच करवाएं
-
हरियाणा के सरकारी अस्पताल कर्मचारियों के प्रोत्साहन, उन्नयन के लिए आयुष्मान और चिरायु फंड का उपयोग करेंगे
-
छिपी हुई स्टेम सेल स्पाइनल स्टेनोसिस को बढ़ावा दे सकती हैं: अध्ययन
-
जलन महसूस हो रही है? यह लैक्टिक एसिड नहीं है
-
पेटा इंडिया ने 2 अक्टूबर से मांस के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने की वकालत की
-
अतिरिक्त स्क्रीन टाइम, खराब मुद्रा बच्चों की रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य में योगदान दे सकती है: विशेषज्ञ
-
घरेलू बिल्लियाँ मनुष्यों के लिए बेहतर कैंसर उपचार अनलॉक करने में मदद कर सकती हैं: अध्ययन
-
स्वास्थ्य कैप्सूल
-
बच्चों में फ्लू: माता-पिता को क्या जानना चाहिए
-
Levocetirizine लंबे समय तक उपयोग के लिए सुरक्षित, लेकिन लगातार लक्षण गैर-एलर्जिक राइनाइटिस हो सकते हैं
-
जम्मू-कश्मीर में 51,000 कैंसर के मरीज स्क्रीनिंग और उपचार का विस्तार किया गया: मंत्री
-
ब्राजील से परजीवी की रिपोर्ट पर टूना से बचने की जरूरत नहीं: मत्स्य पालन संस्थान
-
गर्भावस्था में होने वाले दुर्लभ संक्रमण से ऑटिज्म का खतरा तीन गुना हो सकता है: अध्ययन
-
पंचकूला पुलिस ने दिल्ली के लिए अंग परिवहन के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया
-
पंचकूला पुलिस ने दिल्ली के लिए अंग परिवहन के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया
-
एचआईवी इंजेक्शन वायरस को दैनिक गोलियों की तुलना में बेहतर तरीके से दबाते हैं: अध्ययन
-
35 के बाद, बीपी और रक्त शर्करा की जांच को अपने स्वास्थ्य दिनचर्या का हिस्सा बनाएं
-
भारत के सीजीएचएस परिवार का दायरा बढ़ता है, लेकिन कार्डधारकों को कोई अतिरिक्त योगदान नहीं देना पड़ता
-
मस्तिष्क की गतिविधि जोखिम भरे फैसलों को होने से पहले ही भविष्यवाणी कर सकती है: अध्ययन
-
हरियाणा के मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद आईएमए ने 16 सितंबर से आयुष्मान सेवाओं को निलंबित करने का आह्वान वापस लिया
-
17 वर्षीय ने भाई को बचाने के लिए स्टेम सेल दान किए, क्योंकि होमी भाभा कैंसर अस्पताल ने पहला एलोजेनिक बीएमटी किया
-
उत्तर भारत में सर्दियों के प्रदूषण में सालाना 70 फीसदी बदलाव की वजह से पश्चिमी विक्षोभ: अध्ययन
-
करनाल: 1 और एच1एन1 वायरस के लिए पॉजिटिव पाए गए; कुल पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 36 हुई
-
बच्चों को खतरा, सुप्रीम कोर्ट ने एफएसएसएआई के फूड लेबलिंग में कमियों को चिह्नित किया
-
बाबा रामदेव का ‘आयुर्वेदिक हुक्का’ वायरल हर्बल ट्विस्ट पर इंटरनेट की प्रतिक्रिया
-
उत्तर भारत में सर्दियों के प्रदूषण में सालाना 70 फीसदी बदलाव की वजह से पश्चिमी विक्षोभ: अध्ययन
-
करनाल: 1 और एच1एन1 वायरस के लिए पॉजिटिव पाए गए; कुल पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 36 हुई
-
स्वास्थ्य कैप्सूल
-
कूल्हे के फ्रैक्चर के बाद बुजुर्गों को तेजी से पैरों पर वापस लाएं
-
तनाव अस्थायी उच्च रक्तचाप का कारण बन सकता है, लेकिन इसे अनदेखा न करें
-
शंघाई ने जन्म दर बढ़ाने के लिए मातृ देखभाल को मुफ्त बनाया
-
आयरन ट्रांसपोर्टिंग प्रोटीन हृदय रोग के शीघ्र निदान में मदद कर सकता है: अध्ययन
-
अंबाला के डॉक्टरों ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए नेपाल में चिकित्सा शिविर लगाए
-
पीसीओएस का नया नाम पीएमओएस क्यों है
-
नियामक ने रेबीज वैक्सीन बैच को घटिया बताया
-
पटना हाईकोर्ट को करीब दो महीने के इंतजार के बाद नियमित मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। केंद्र सरकार ने देश के विभिन्न हाईकोर्ट में आठ मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति की घोषणा की है। इसमें दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस वल्लूरी कामेश्वर राव को पटना हाईकोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने नियुक्तियों की जानकारी दी। छह अगस्त 2026 को हुई कॉलेजियम की बैठक में उनके नाम पर मुहर लगी थी। नियुक्ति को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद अब जस्टिस राव के शपथ ग्रहण की तारीख का औपचारिक एलान होना बाकी है। जस्टिस वी. कामेश्वर राव पटना हाईकोर्ट के 49वें नियमित मुख्य न्यायाधीश होंगे। इससे पहले मुख्य न्यायाधीश मीनाक्षी मदन राय के 11 जुलाई 2026 को सेवानिवृत्त होने के बाद वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस सुधीर सिंह कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अगस्त 2027 में सेवानिवृत्त होंगे जस्टिस राव जस्टिस वल्लूरी कामेश्वर राव का जन्म 7 अगस्त 1965 को आंध्र प्रदेश के कोनसीमा जिले के पोन्नामंडा गांव से जुड़े परिवार में हुआ था। उनकी शिक्षा दिल्ली में हुई। उन्होंने वर्ष 1987 में दिल्ली विश्वविद्यालय से भूगोल में बीए आनर्स की डिग्री हासिल की। इसके बाद 1990 में एलएलबी की पढ़ाई पूरी की।मार्च 1991 में दिल्ली बार काउंसिल में पंजीकरण कराने के बाद उन्होंने वकालत शुरू की। करीब दो दशक तक उन्होंने सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाईकोर्ट और केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) में विभिन्न मामलों की पैरवी की। सेवा संबंधी मामलों, श्रम कानून, संवैधानिक एवं प्रशासनिक कानून और मध्यस्थता से जुड़े मामलों में उनकी विशेष विशेषज्ञता रही है।
-
पानीपत में स्वाइन फ्लू के 4 और डेंगू के 7 मामले सामने आए
-
वजन घटाने की दवाएं और बालों का झड़ना: नए अध्ययन में पुरुषों में आनुवंशिक संबंध पाया गया
-
अध्ययन साझा प्रक्रिया को 5 अलग-अलग बीमारियों में पुरानी थकावट से जोड़ता है
-
नियमित फ्लू के लिए H1N1 की गलती न करें; शुरुआती लक्षण मायने रखते हैं: डॉक्टर
-
गर्भधारण से पहले माता-पिता में विटामिन बी 12 का उच्च स्तर जन्म दोष के जोखिम को कम कर सकता है: अध्ययन
-
पीजीआई ने 7 महीने के शिशु पर भारत के सबसे कम उम्र के द्विपक्षीय कॉक्लियर प्रत्यारोपण में से एक किया
-
शिमला में एच1एन1 से संक्रमित होने से एक व्यक्ति की मौत
-
8 लोगों के स्वाइन फ्लू पॉजिटिव आने के बाद जम्मू-कश्मीर स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी किया
-
शिमला में एच1एन1 से संक्रमित होने से एक व्यक्ति की मौत
-
कपूरथला में ओवरडोज से हुई संदिग्ध मौतों ने एक महीने में 3 लोगों की जान ले ली, पीड़ितों के लिए ‘दोस्त’ घातक हो गए
-
कुपोषण से बढ़ रहा डायबिटीज का खतरा? क्या है टाइप 5 डायबिटीज
-
विटामिन डी से जुड़ी गलती… खुद से गोली लेना और फिर बंद कर देना, ये कितना खतरनाक?
-
पतले लोगों में फैटी लिवर हो सकता है? क्या होती है ये बीमारी? एक्सपर्ट से जानें
-
Nuts Nutrients: मूंगफली से बादाम-अखरोट तक, जान लें कौन से नट्स में कौन सा पोषक तत्व है ज्यादा
-
मानसून में क्यों बढ़ जाता है जोड़ों का दर्द? जानिए मौसम और शरीर के बीच का कनेक्शन
-
स्टेंट डलने के बाद क्या दोबारा नहीं पड़ सकता हार्ट अटैक? क्या कहते हैं डॉक्टर
-
सिर्फ एक साल में 56 बॉडीबिल्डरों की मौत, औसत उम्र महज 35; फिट दिखने वाले इन एथलीट्स की जान जल्दी क्यों जा रही है?
-
कैंसर के इलाज में क्यों झड़ने लगते हैं बाल? एक्सपर्ट से जानें जरूरी बातें
-
बिना वजह वजन कम होना, भूख घटना…कहीं कैंसर के लक्षण तो नहीं, डॉक्टर से जानें
-
गर्मी में पाचन रहेगा दुरुस्त, शरीर ठंडा…बनाकर पिएं रागी अम्बाली, नोट करें रेसिपी
-
बढ़ती गर्मी में हीट स्ट्रोक का खतरा, क्या होते हैं लक्षण, कैसे करें बचाव
-
सत्तू शरबत से गोंधोराज घोल तक…गर्मियों में देश के अलग-अलग हिस्सों में पी जाती हैं ये ड्रिंक्स
-
गट हेल्थ से जुड़ी वो 7 गलतियां जो अमूमन लोग हैं करते, हार्वर्ड एक्सपर्ट की राय
-
क्या ज्यादा सोचने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है?
-
पंजाब भर में मौसमी बीमारियों के बढ़ते मामलों के बीच भगवंत मान सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ बनी जीवनरेखा
-
पेट के निचले हिस्से में दर्द को नजरअंदाज न करें महिलाएं, इन बीमारियों का हो सकता है संकेत
-
क्या स्क्रीन टाइम बढ़ा रहा है माइग्रेन? एक्सपर्ट से जानें