गट हेल्थ का ये मतलब नहीं है कि ये आपकी पूरी पेट की सेहत को दर्शाता है. गट से कई चीजें जुड़ी हैं जिसमें आंतों की हेल्थ पर सबसे ज्यादा फोकस किया जाता है. इसमें पेट ही नहीं, छोटी-बड़ी आंत, भोजन नली, लिवर, पैंक्रियाज और गुड बैक्टीरिया शामिल होते हैं. वैसे लोगों में इसको लेकर कई मिथक पॉपुलर हो रखे हैं. इनमें सबसे बड़ा मिथक ये है कि गट हेल्थ का मतलब सिर्फ पेट से हैं. जबकि ऐसा नहीं है. इस टॉपिक पर टीवी9 ने डॉ. साद अनवर (सीनियर कंसल्टेंट, गैस्ट्रो सर्जरी अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल) से खास बातचीत की.
उनका कहना है कि आजकल ‘गट हेल्थ’ शब्द काफी सुनने को मिलता है, लेकिन इसके बारे में कई गलतफहमियां भी फैली हुई हैं. चलिए आपको बताते हैं इससे जुड़ी कुछ जरूरी बातें…
क्या होती है गट हेल्थ? Gut Health
एक्सपर्ट कहते हैं कि गट हेल्थ का मतलब केवल पेट का ठीक रहना नहीं है, बल्कि हमारी आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन, सही पाचन और पोषक तत्वों का उचित अवशोषण भी इसमें शामिल है. एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर खाना ठीक से पच रहा है, न्यूट्रिएंट्स एब्जॉर्ब हो रहे हैं, पेट साफ रहता है और आंतों में गुड बैक्टीरिया का बैलेंस बना हुआ है तो आपकी गट हेल्थ अच्छी है.
गट हेल्थ क्यों जरूरी है?
गट हेल्थ का सीधा कनेक्शन हमारी आंतों से हैं और इन्हें शरीर का दूसरा दिमाग पुकारा जाता है. दरअसल, आंतों का कनेकशन सिर्फ पाचन से नहीं बल्कि इम्यूनिटी, मेंटल हेल्थ और बॉडी के दूसरे अंगों से भी होता है. इम्यूनिटी की बात करें तो बॉडी का 70 फीसदी इम्यून सिस्टम आंतों से जुड़ा होता है. हेल्दी गट हानिकारक बैक्टीरिया और इंफेक्शन से बचाने में हेल्प करता है.
गट हेल्थ से जुड़े मिथक एक्सपर्ट से जानें
डिटॉक्स ड्रिंक से जुड़ा मिथक- डॉ. साद अनवर कहते हैं कि अक्सर लोग मान लेते हैं कि रोज़ प्रोबायोटिक सप्लीमेंट लेने या डिटॉक्स ड्रिंक पीने से गट हेल्थ अपने आप बेहतर हो जाएगी, जबकि ऐसा नहीं है. हर व्यक्ति की आंतों की ज़रूरत अलग होती है और बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट लेना हमेशा फायदेमंद नहीं होता.
गट को लेकर कंफ्यूजन- एक और मिथक यह है कि अगर पेट में दर्द, गैस या कब्ज नहीं है तो गट पूरी तरह स्वस्थ है, जबकि कई बार गट से जुड़ी समस्याएं बिना स्पष्ट लक्षणों के भी हो सकती हैं.
ऐसे ठीक रखें गट हेल्थ- इसको बेहतर बनाए रखने के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त फाइबर, दही जैसी प्राकृतिक प्रोबायोटिक चीजें, पर्याप्त पानी, नियमित व्यायाम और अच्छी नींद सबसे अधिक जरूरी हैं.
एंटीबायोटिक्स का रोल- साथ ही, बिना जरूरत एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे आंतों के अच्छे बैक्टीरिया प्रभावित हो सकते हैं. किसी भी लंबे समय तक रहने वाली पाचन संबंधी समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय विशेषज्ञ से परामर्श लेना सबसे सही कदम है.
दही से गट हेल्थ की केयर- लोग ये भी मान लेते हैं कि अगर वो दही खा रहे हैं तो इससे उनकी गट हेल्थ हमेशा ठीक रहेगी. ये प्रोबायोटिक का बेहतरीन सोर्स है लेकिन इस पर ही भरोसा करने लेना ठीक नहीं है. एक्सपर्ट के मुताबिक गट हेल्थ को सही रखने के लिए फाइबर, बैलेंस डाइट, फिजिकली एक्टिव रहना, अच्छी नींद के जरिए हेल्दी लाइफस्टाइल जरूरी है
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पटना हाईकोर्ट को करीब दो महीने के इंतजार के बाद नियमित मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। केंद्र सरकार ने देश के विभिन्न हाईकोर्ट में आठ मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति की घोषणा की है। इसमें दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस वल्लूरी कामेश्वर राव को पटना हाईकोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने नियुक्तियों की जानकारी दी। छह अगस्त 2026 को हुई कॉलेजियम की बैठक में उनके नाम पर मुहर लगी थी। नियुक्ति को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद अब जस्टिस राव के शपथ ग्रहण की तारीख का औपचारिक एलान होना बाकी है। जस्टिस वी. कामेश्वर राव पटना हाईकोर्ट के 49वें नियमित मुख्य न्यायाधीश होंगे। इससे पहले मुख्य न्यायाधीश मीनाक्षी मदन राय के 11 जुलाई 2026 को सेवानिवृत्त होने के बाद वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस सुधीर सिंह कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अगस्त 2027 में सेवानिवृत्त होंगे जस्टिस राव जस्टिस वल्लूरी कामेश्वर राव का जन्म 7 अगस्त 1965 को आंध्र प्रदेश के कोनसीमा जिले के पोन्नामंडा गांव से जुड़े परिवार में हुआ था। उनकी शिक्षा दिल्ली में हुई। उन्होंने वर्ष 1987 में दिल्ली विश्वविद्यालय से भूगोल में बीए आनर्स की डिग्री हासिल की। इसके बाद 1990 में एलएलबी की पढ़ाई पूरी की।मार्च 1991 में दिल्ली बार काउंसिल में पंजीकरण कराने के बाद उन्होंने वकालत शुरू की। करीब दो दशक तक उन्होंने सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाईकोर्ट और केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) में विभिन्न मामलों की पैरवी की। सेवा संबंधी मामलों, श्रम कानून, संवैधानिक एवं प्रशासनिक कानून और मध्यस्थता से जुड़े मामलों में उनकी विशेष विशेषज्ञता रही है।
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